सदियों पहले छोड़ चुका हूँ दामन फिर भी जाने क्यूँ
मेरे चादर से अब तक उस शख़्स की ख़ुशबू आती है
मेरे चादर से अब तक उस शख़्स की ख़ुशबू आती है
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ये ज़मीं आसमाँ से जहाँ पे मिलती है
हम लोग भी मिलेंगे अब वहीं जा कर
हम लोग भी मिलेंगे अब वहीं जा कर
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गुनाह कर के गुनहगार की मैं शफ में तो खड़ा हूँ
अब इस से ज़्यादा आँख का पानी क्या दिखाऊँ
अब इस से ज़्यादा आँख का पानी क्या दिखाऊँ
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