दिल से कैसा है ये मालूम नहीं, पर वो शख़्स
शक्ल से साहिब-ए-ईमान नज़र आता है
शक्ल से साहिब-ए-ईमान नज़र आता है
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मेरे माँ बाप अनपढ़ हैं मगर वो
मेरे चेहरे को पढ़ना जानते हैं
मेरे चेहरे को पढ़ना जानते हैं
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रक़्स करते हैं सारे बंदर हैं
वो जो ऊपर है ना मदारी है
वो जो ऊपर है ना मदारी है
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छीन कर हक़ किसी का जश्न-ए-बहारा कर लें
इस से बेहतर है दो रोटी पे गुज़ारा कर लें
इस से बेहतर है दो रोटी पे गुज़ारा कर लें
एक लम्हे को सही रेत पे तो आती है
हम समुंदर से भला कैसे किनारा कर लें
डूबना तैरना सब आप के ही ऊपर है
आप गर चाहें तो तिनके को सहारा कर लें
जिस्म से जान कभी भी जुदा हो सकती है
इस लिए केहते है आओ के कफारा कर लें
क्या ज़रूरी है के हर रात सितारे आएँ
रौशनी के लिए जुगनू से शरारा कर लें
मेरा माज़ी मेरे अमरोज़ का भी है दुश्मन
और वो कहते हैं के इश्क़ दुबारा कर लें
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किसी के वास्ते मुश्किल किसी का आसरा दरिया
मेरी मंज़िल किनारा है मेरा है रास्ता दरिया
मेरी मंज़िल किनारा है मेरा है रास्ता दरिया
मेरा कोई नहीं है जो मुझे ग़म में दिलासा दे
यहीं दरिया निकलता है यहीं फिर सूखता दरिया
तिलिस्मी तुम इशारे कर बुलाओ ना मुझे ऐसे
मेरा दिल मोम-सा है और मोहब्बत आग का दरिया
तुम्हारा ही सिला जानम नदी में जो रवानी है
कभी उस ओर जाना तुम तुम्हें देगा दुआ दरिया
तेरे बस एक कहने पर सभी को छोड़ आए हम
मगर अब याद आता है मेरा लश्कर मेरा दरिया
तुम्हारे बिन हमारा घर बसाना ऐसा है जैसे
सलाम ए आख़िरी कर के समुंदर में मिला दरिया
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मेरे टूटे दिल को ज़रा हौसला दो
हुनर आशिक़ी का मुझे तुम सिखा दो
हुनर आशिक़ी का मुझे तुम सिखा दो
भले शौक से तुम अयादत करो पर
मुझे होश आए ना ऐसी दवा दो
वो बातें पुरानी, पुराना बहाना
यक़ीं आए मुझ को नया फलसफा दो
के मंज़िल को मेरी भले ना चलो तुम
मुझे लौट जाने का पर रास्ता दो
दिया मेरे दिल का तुम्हीं से है रौशन
ये तुमपर ही छोड़ा जला दो बुझा दो
इन आँखों की बीनाई मुमकिन है लौटे
के चेहरे से आँचल ज़रा सा हटा दो
हमारे सुखन कितने हो जाएँ मीठे
अगर तुम हमारी ग़ज़ल गुनगुना दो
तेरा लम्स है जैसे नेमत ख़ुदा की
दरख़्त ए जिगर की ये शाखें हिला दो
तुम्हारी इबादत कहाँ हम ने कम की
हमारे भी हक में कभी फ़ैसला दो
तुम्हारे सितम भी ख़ुशी से सहेंगे
सज़ा दो, मिटा दो या चाहे दग़ा दो
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