ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन
हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था
हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था
10
48 Likes
9
0 Likes
तुम्हें हम से मोहब्बत है हमें तुम से मोहब्बत है
अना का दायरा फिर भी हमारे दरमियाँ क्यूँ है
वही सब कुछ रज़ा उस की तो फिर दिल में गुमाँ क्यूँ है
सवालों और जवाबों से परेशाँ मेरी जाँ क्यूँ है
हर इक मंज़र के पस-मंज़र में तेरा ही करिश्मा है
यक़ीनन ख़ालिक़-ए-कुन तू तो आँखों से निहाँ क्यूँ है
तुझी को है मुयस्सर हर बुराई का दमन करना
तो ना-इंसाफ़ियों के दौर में तू बे-ज़बाँ क्यूँ है
8
0 Likes
कह भी दूँ हाल-ए-दिल अगर शायद
उन पे हो जाए कुछ असर शायद
उन पे हो जाए कुछ असर शायद
अब ज़माना है बे-वफ़ाई का
सीख लें हम भी ये हुनर शायद
बा'द मुद्दत के ये ख़याल आया
रास आया नहीं सफ़र शायद
हम ही अब तक समझ नहीं पाए
कुछ तो कहती है वो नज़र शायद
वैसे तो फ़ासला नहीं कोई
कश्मकश है अगर मगर शायद
हर नज़ारे में उस का ही जल्वा
तुम को आता नहीं नज़र शायद
अजनबी अजनबी से चेहरे हैं
ये नहीं है मिरा नगर शायद
नींद तारी है आसमानों पर
या दुआ में नहीं असर शायद
अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी
ख़त्म होता है ये सफ़र शायद
मौज-दर-मौज एक नश्शा था
अब वो दरिया गया उतर शायद
ज़िंदगी अब तुझे सँवारे क्या
कोशिशें सारी बे-असर शायद
इक जहाँ अजनबी रहा 'मीता'
इक जहाँ मुझ से बा-ख़बर शायद
7
0 Likes
वफ़ा की शान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
है मेरी जान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
है मेरी जान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
उन्हीं का ज़िक्र ग़ज़ल भी वही फ़साना भी
सुख़न की आन वो लेकिन कभी मिरे न हुए
नशा है उन की सदा का कि धड़कनें मेरी
रहा गुमान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
गुलों में रंग उन्हीं से महक महक उन से
चमन की शान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
वही हैं शम्स ओ क़मर बहर ओ बर मिरे 'मीता'
हैं इक जहान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
6
0 Likes
अजीब दिल है इसी दिल का अब तक़ाज़ा है
किसी भी बज़्म में अब उस की गुफ़्तुगू न रहे
मज़ा तभी है मोहब्बत में ग़र्क़ होने का
मैं डूब जाऊँ तो ये हो कि तू भी तू न रहे
बताओ उन की इबादत क़ुबूल क्या होगी
नमाज़-ए-इश्क़ में जो लोग बा-वज़ू न रहे
ख़ुदा बना दिया उन को मेरी मोहब्बत ने
हमेशा दिल में रहे और रू-ब-रू न रहे
5
2 Likes
क्या क्या मुग़ालते दिए दौर-ए-जदीद ने
नफ़रत को प्यार प्यार को नफ़रत बना दिया
हम ने हज़ार फ़ासले जी कर तमाम शब
इक मुख़्तसर सी रात को मुद्दत बना दिया
ऐ जान अपने दिल पे मुझे नाज़ क्यूँ न हो
इक ख़्वाब था कि जिस को हक़ीक़त बना दिया
मख़्सूस हद पे आ गई जब बे-रुख़ी तिरी
उस हद को हम ने हासिल-ए-क़िस्मत बना दिया
4
0 Likes
कौन था मेरे अलावा उस का
उस ने ढूँडे थे ठिकाने क्या क्या
रहमत-ए-इश्क़ ने बख़्शे मुझ को
उस की यादों के ख़ज़ाने क्या क्या
आज रह रह के मुझे याद आए
उस के अंदाज़ पुराने क्या क्या
रक़्स करती हुई यादें उन की
और दिल गाए तराने क्या क्या
तेरा अंदाज़ निराला सब से
तीर तो एक निशाने क्या क्या
आरज़ू मेरी वही है लेकिन
उस को आते हैं बहाने क्या क्या
राज़-ए-दिल लाख छुपाया लेकिन
कह दिया उस की अदा ने क्या क्या
दिल ने तो दिल ही की मानी 'मीता'
अक़्ल देती रही ता'ने क्या क्या
3
0 Likes
मुझ से इरशाद ये होता है कि समझूँ उन को
और फिर भीड़ में दुनिया की वो खो जाते हैं
दर्द जब ज़ब्त की हर हद से गुज़र जाता है
ख़्वाब तन्हाई के आग़ोश में सो जाते हैं
बस यूँही कहते हैं वो मेरे हैं मेरे होंगे
और इक पल में किसी और के हो जाते हैं
हम तो पाबंद-ए-वफ़ा पहले भी थे आज भी हैं
आप ही फ़ासले ले आए तो लो जाते हैं
कोई तदबीर न तक़दीर से लेना-देना
बस यूँही फ़ैसले जो होने हैं हो जाते हैं
कुछ तो एहसास-ए-मोहब्बत से हुईं नम आँखें
कुछ तिरी याद के बादल भी भिगो जाते हैं
2
1 Like
ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन
हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था
हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था
का'बा ओ दैर में अब ढूँड रही है दुनिया
जो दिल ओ जान में बस्ता था ख़ुदा और ही था
अब ये आलम है कि दौलत का नशा तारी है
जो कभी इश्क़ ने बख़्शा था नशा और ही था
दूर से यूँही लगा था कि बहुत दूरी है
जब क़रीब आए तो जाना कि गिला और ही था
मेरे दिल ने तो तुझे और ही दस्तक दी थी
तू ने ऐ जान जो समझा जो सुना और ही था
1
3 Likes









