Varun Anand

Top 10 of Varun Anand

    जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
    उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़
    Varun Anand
    10
    57 Likes
    ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है
    मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

    दग़ा भी दूँगा प्यार में कभी कभी
    कि ये मिरा उसूल है क़ुबूल है

    तुझे जहाँ अज़ीज़ है तो छोड़ जा
    मुझे ये शय फ़ुज़ूल है क़ुबूल है

    तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
    जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है

    लिपट ऐ शाखे गुल मगर ये सोच कर
    मेरा बदन बबूल है क़ुबूल है

    यही है गर तिरी रज़ा तो बोल फिर
    क़ुबूल है क़ुबूल है क़ुबूल है
    Read Full
    Varun Anand
    9
    42 Likes
    रब्त है मुझ से तिरा तो रब्त का उनवान बोल
    या मुझे अंजान कह दे या फिर अपनी जान बोल

    एक ही चेहरा नज़र में और लबों पे इक ही नाम
    और क्या होती है सच्चे इश्क़ की पहचान बोल ?

    मैं अँगूठी बेच कर ले आया तेरी बालियाँ
    सूने-सूने देखता कब तक मैं तेरे कान बोल

    ये मुलायम हाथ मेरे काम कब आएँगे जाँ?
    कब बिछेगा इन से मेरे घर में दस्तर-ख़्वान बोल ?

    कब मिलेगी सुब्ह तुझ से चाय की प्याली मुझे?
    कब तेरे हाथों का खाऊँगा कोई पकवान बोल ?

    कब तिरे वालिद मिरे वालिद से मिलने आएँगे?
    कब तिरी अम्मी को बोलूँगा मैं अम्मी जान बोल?

    पूछते है सब तिरा मैं कौन हूँ क्या नाम है
    बोलने का वक़्त है अब, बोल मेरी जान बोल
    Read Full
    Varun Anand
    8
    22 Likes
    तेरे पीछे होगी दुनिया पागल बन
    क्या बोला मैं ने कुछ समझा? पागल बन

    सहरा में भी ढूँढ़ ले दरिया पागल बन
    वरना मर जाएगा प्यासा पागल बन

    आधा दाना आधा पागल नइँ नइँ नइँ
    उस को पाना है तो पूरा पागल बन

    दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नहीं
    पागल खाना है ये दुनिया पागल बन

    देखें तुझ को लोग तो पागल हो जाएँ
    इतना उम्दा इतना आला पागल बन

    लोगों से डर लगता है तो घर में बैठ
    जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
    Read Full
    Varun Anand
    7
    83 Likes
    अपनी आँखों में भर कर ले जाने हैं
    मुझ को उस के आँसू काम में लाने है

    देखो हम कोई वहशी नइँ दीवाने हैं
    तुम से बटन खुलवाने नइँ लगवाने हैं

    हम तुम इक दूजे की सीढ़ी है जानाँ
    बाक़ी दुनिया तो साँपों के ख़ाने हैं

    पाक़ीज़ा चीज़ों को पाक़ीज़ा लिखो
    मत लिक्खो उस की आँखें मय-ख़ाने हैं
    Read Full
    Varun Anand
    6
    64 Likes
    उस से मुहब्बत
    झीलें क्या हैं?
    उस की आँखें

    उम्दा क्या है?
    उस का चेहरा

    ख़ुश्बू क्या है?
    उस की साँसें

    ख़ुशियाँ क्या हैं?
    उस का होना

    तो ग़म क्या है?
    उस से जुदाई

    सावन क्या है?
    उस का रोना

    सर्दी क्या है?
    उस की उदासी

    गर्मी क्या है?
    उस का ग़ुस्सा

    और बहारें?
    उस का हँसना

    मीठा क्या है?
    उस की बातें

    कड़वा क्या है?
    मेरी बातें

    क्या पढ़ना है?
    उस का लिक्खा

    क्या सुनना है?
    उस की ग़ज़लें

    लब की ख़्वाहिश?
    उस का माथा

    ज़ख़्म की ख़्वाहिश?
    उस का छूना

    दुनिया क्या है?
    इक जंगल है

    और तुम क्या हो?
    पेड़ समझ लो

    और वो क्या है?
    इक राही है

    क्या सोचा है?
    उस से मुहब्बत

    क्या करते हो?
    उस से मुहब्बत

    मतलब पेशा?
    उस से मुहब्बत

    इस के अलावा?
    उस से मुहब्बत

    उस से मुहब्बत........
    Read Full
    Varun Anand
    5
    479 Likes
    चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़
    सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़

    वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं
    उस से मुहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़

    जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
    उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़

    ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से
    चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़

    सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है
    सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़

    उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
    उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
    Read Full
    Varun Anand
    4
    410 Likes
    देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं
    तुम से बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
    Varun Anand
    1
    300 Likes