humeen karte the din raushan tumhaara | हमीं करते थे दिन रौशन तुम्हारा

  - Ankit Maurya

हमीं करते थे दिन रौशन तुम्हारा
हमीं से भर गया अब मन तुम्हारा

उदासी आ लगे मेरे गले से
हो ख़ुशियों से भरा दामन तुम्हारा

नहीं जाती तुम्हारी ख़ुशबू याँ से
है मेरे पास पैराहन तुम्हारा

किसी ने पूछा था हम सेे ख़ुदा है?
ज़ुबां पे नाम था रस्मन तुम्हारा

दिलों को तोड़ना तुम जानते हो
यही तो है मेरी जाँ फ़न तुम्हारा

हैं सीता की तरह हम घर से निकले
तो यानी राम सा था मन तुम्हारा

उसी आंगन के टुकड़े कर रहे हो
जहाँ खेला कभी बचपन तुम्हारा

  - Ankit Maurya

Hug Shayari

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